नि:कांक्षित Absence of Misguided Tendencies

 

 

जो दु ण करेदि कंखं, कम्मफलेसु तह य सव्व-धम्मेसु।
सो णिक्कंखो चेदा, सम्मादिट्ठी मुणेयव्वो।।१५।।SSU

 

चाह जिसे कोई नहीं,  धरम-करम फल भान।
चाहरहित समझे उसे, सम्यक दृष्टि वो मान॥२.१८.१५.२३३॥

 

जो समस्त कर्मफलों मे और सम्पूर्ण वस्तु धर्मों मे किसी भी प्रकार की आकांक्षा नही रखता, इलाक़ों निरकांक्ष सम्यग्दृष्टि समझना चाहिये।

 

A person who has no longing for the fruits of Karmas and for all objects or any of the operties of a thing, is possessed of Right Faith. (233)