अमूढता Free from Delusion

 

जो हवदि असम्मूढो, चेदा सव्वेसु कम्म-भावेसु।
सो खलु अमूढ-दिट्ठी, सम्मादिट्ठी मुणेदव्वो।।१९।।SSU

 

जो व्यक्ति विमूढ नहीं, चेतन दृष्टि सुभाव।
अमूढ दृष्टि कहते उसे, सम्यक दृष्टि स्वभाव॥२.१८.१९.२३७॥

 

जो समस्त भावो के प्रति विमूढ नही है, जागरुक है वह अमूढदृ्ष्टि सम्यग् है।

 

He who is completely devoid of delusion as to the nature of things is certainly understood to be the non-deluded right-believer. (237)