प्रभावना Propagation

 

धम्म-कहा-कहणेण य, बाहिर-जोगेहिं चावि णवज्जेहिं।
धम्मो पहाविदव्वो, जीवेसु दयाणुकंपाए।।२५।।SSu

 

धर्म कथा का कथन करे, बाह्य योग अभ्यास।
करना धर्म प्रभावना, जीव दया मन वास॥२.१८.२५.२४३॥

 

बाह्य ऋतुओं को ध्यान मे रखते हुए, धर्म कथा के कथन द्वारा जीवों पर दया करते हुए धर्म की प्रभावना करनी चाहिये।

 

The radiance of religion should be spread by narration of religious stories, by performance of dispassionate external austerities and by showing mercy and compassion towards living beings. (243)