उपगूहन Protection

 

णो छादए णोऽवि य लूसएज्जा, माणं ण सेवेज्ज पगासणं च।
ण या वि पण्णे परिहास कुन्जा, ण याऽऽ सियावाद वियागरेज्झा।।२१।।SSU

 

ना ढके ना कहे ग़लत, चाहे नहीं प्रचार।
ज्ञानी की निंदा नहीं, ना वरदान विचार॥२.१८.२१.२३९॥

 

न शास्त्र के अर्थ को छिपाये और नही शास्त्र की असम्यक् व्याख्या करे। न मान करे न अपने बड़प्पन का प्रदर्शन करे। न किसी विद्वान का परिहार करे न किसी को आशीर्वाद दे।

 

The wise man should not conceal the meaning of a scriptural text nor should he distort it; he should not harbour pride or a tendency to self-display; he should not make fun of anyone or bestow words of blessing on anyone. (239)