वात्सल्य Selfless Affection

 

जो धम्मिएसु भत्तो अणुचरणं कुणदि परम-सद्धाए।
पिय-वयर्ण जंपंतो, वच्छल्लं तस्स भव्वस्स।।२४।।SSu

 

धर्म का अनुसरण करे, श्रद्धा और अनुराग।
प्रियवचन हरपल कहे, वातसल्य सम्यक् राग॥२.१८.२४.२४२॥

 

 

जो धार्मिक जनों मे अनुराग रखता है, श्रद्धापूर्वक उनकी अनुशरण करता है तथा प्रिय वचन बोलता है वो वात्सल्य सम्यग्दृष्टि है।

 

The great person, who is full of devotion for fellow religious person, follows them with a feeling of great faith, and utters loveable words, is possessed of affection. (242)