ब्रह्मचर्याणुव्रत के अतिचार Violation of Celibacy Vow

 

 

परविवाहकरण्त्वरिकापरगृहितापरिगृहितागमनानंगक्रीडाकामतीव्राभिनिवेशा:॥२८॥TS

 

पर विवाह रुचिकर लगे, पर स्त्री व्यभिचार।
अनंग क्रीडा काम तीव्रता, ब्रह्मचर्य अतिचार॥२८॥२६४॥

 

१। पर विवाह में रुचि लेना

२। पराई विवाहित स्त्री से व्यभिचार

३। पराई अविवाहित स्त्री से व्यभिचार

४। अनंगक्रीडा – काम सेवन के अंग को छोड़कर अन्य अंग से क्रीड़ा

५। मन में काम की तीव्रता के भाव रखना

 

Five violations of celibacy vow:

  • Taking interest in wedding of others
  • Affair with other married person
  • Affair with other unmarried person
  • Using other than designated body parts for intercourse

Excessive sensual feelings

 

अन्यविवाहाकरणानंगक्रीडा विटत्व विपुलतृष:।
इत्वरिकागमनं चास्मरस्य पंच व्यतीचारा:॥६०॥

 

अन्य विवाह, क्रीड़ा अनंग, कामुक कर्म विचार।
तीव्र चाह, व्यभिचरण, ब्रह्मचर्यव्रत अतिचार॥३.१४.६०॥RKS

 

ब्रह्मचर्य अणुव्रत के पाँच अतिचार- अन्य का विवाह कराना, अनंग क्रीड़ा, कामुक चेष्टा व वचन, कामसेवन की तीव्र अभिलाषा करना व व्यभिचारिणी स्त्रियों के यहाँ आना जाना।

 

Five violations of brahmacharyaanuvrat (vow of chastity): match making for others children, unnatural sex, using erotic actions and words, excessive passion in sex and visiting prostitutes.