सामायिक व्रत के अतिचार Violation of Equanimity Vow

 

 

योगदु:प्रणिधानानादरस्मृत्यनुपस्थानानि॥३३॥TS

 

मन वचन काय कुचेष्टा, अनुत्साह का भार।
भूल प्रवृत्ति ध्यान नहीं, सामायिक अतिचार॥७.३३.२६९॥

 

सामायिक व्रत के पाँच अतिचार

१। काय कुचेष्टा

२। वचन कुचेष्टा

३। मन कुचेष्टा

४। सामायिक में अनुत्साह

५। एकाग्रता के अभाव में सामायिक आदि पाठ को भूल जाना।

 

5 violations of samayik:

  • Unnecessary use of body
  • Unnecessary use of words
  • Unnecessary us of thoughts
  • Lack of enthusiasm in samayik
  • Forgetting due to lack of concentration

 

सावज्जजोगं परिरक्खणट्ठा, सामाइयं केवलियं पसत्थं।
गिहत्थ-धम्मा परमं ति नच्चा, कुज्जा बुहो आयहियं परत्था।।२६।।SSu

 

सामायिक मंगल करे, रहे हिंसा भाव।
जाने गृहस्थ धर्म को, आत्म मुक्ति प्रभाव॥२.२३.२६.३२६॥

 

हिंसा आरम्भ से बचने के लिये सामायिक व्रत उत्तम है। विद्वान श्रावक को आत्महित तथा मोक्ष प्राप्ति के लिये सामायिक करनी चाहिये।

 

Aimed at refrainment from sinful acts, the only auspicious religious act is samayika. Hence considering it to be something superior to a householder’s ordinary acts, an intelligent person ought to perform samayika for the sake of one’s own welfare.(326)