प्रोषधोपवास व्रत के अतिचार Violations of Fasting Vow

 

 

अप्रत्यवेक्षिताप्रामार्जितोत्सर्गादानसंस्तरोपक्रमणानादरस्मृत्यनुपस्थानानि॥३४॥TS

 

ना देखे शोधे बिना, उत्सर्ग व व्यवहार।
अनादर या भूल करे, प्रोषध का अतिचार॥७.३४.२७०॥

 

प्रोषधोपवास व्रत के पाँच अतिचार:

१। अप्रत्यवेक्षित अप्रमार्जित उत्सर्ग – बिना देखे बिना शोधे मल मूत्र आदि का क्षेपण

२। अप्रत्यवेक्षित अप्रमार्जित आदान- बिना देखे बिना शोधे वस्तु का ग्रहण

३। अप्रत्यवेक्षित अप्रमार्जित संस्तरोपक्रमण- बिना देखे बिना शोधे ज़मीन पर कुछ रखना

४। अनादर- उत्साह रहित धर्म कार्य करना

५। स्मृत्यअनुपस्थान- आवश्यक धर्म कार्य को भूल जाना

 

5 violation during limited ascetic period (Proshadhopavas)

  • Without inspecting and cleaning discharge of urine etc.
  • Without inspecting and cleaning accepting any thing
  • Without inspecting and cleaning keeping something on floor or place.
  • Following partial asceticism without enthusiasm.
  • Forgetting necessary actions due to lack of concentration

 

आहार देहसक्कार-बंभाऽवावारपोसहो य णं।
देसे सव्वे य इमं, चरमे सामइयं णियमा।।२९।।SSu

 

अन्न, तन ध्यान, ब्रह्मचर्य, कर्म त्याग व्रत चार।
सामायिक हो नियम से, पौषध व्रत विचार॥२.२३.२९.३२९॥

 

 

आहार, शरीर संस्कार, अब्रह्म तथा आरम्भ त्याग ये चार बातें प्रोषधोपवास नामक शिक्षाव्रत मे आती है। जो सम्पूर्ण प्रोषध करता है उसे नियमित: सामायिक करनी चाहिये।

 

Posadhopavas involves abstinence from food, from embellishment of the body, from sexual union and from violence. It is of two types, viz., partial and total and performing posadha of the latter type one must necessarily perform samayika. (329)