अणु Atom

 

नाणो: ॥११॥

 

परमाणु का भाग नहीं, न ही कोई प्रदेश।
स्वयं ही आदि अंत है, जान उसे अप्रदेश॥५.११.१७८॥

 

अणु के अन्य प्रदेश नहीं होते।

 

Atom is indivisible unit hence no space point.

 

भेदादणु: ॥२७॥

 

नहीं भेद जब कर सके, उत्पत्ति अणु की जान।
संघात से अणु न रहे, अणु अभेद पहचान॥५.२७.१९३॥

 

अणु की उत्पत्ति स्कंधों के भेद से होती है संघात से नहीं।

 

The atom is produced by division.

 

अंतादि-मज्झ-हीणं, अपदेसं इंदिएहिं ण हु गेज्झ।
जं तव्वं अविभत्तं, तं परमाणुं कहंति जिणा।।२॰।।SSu

 

आदि मध्य है अन्त रहित , इक प्रदेश नहीं भाग।
ग्रहण इन्द्रियाँ करें नहीं  अणु न परम् विभाग॥३.३५.२०.६४३॥

 

जो आदि, मध्य और अन्त से रहित है, जो केवल एक प्रदेशों है, जिसे इन्द्रियों द्वारा ग्रहण नही किया जा सकता वह विभागविहीन द्रव्य परमाणु है।

 

The substance of the particle of matter (paramanu dravya) is without beginning, without middle and without end; it has hot only one space unit (pradesh) neither their space units nor more than two. It is not perceivable by sense organs. It is indivisible. (643)

 

वण्ण-रस-गंध-फासे, पूरण-गलणाइ सव्व-कालम्हि।
खंदं पि व कुणमाणा, परमाणु पुग्गला तम्हा।।२१।।SSu

 

स्पर्श गंध रस पूर्ण गलन, होते रहते काल।
स्कंध सहित परमाणु भी, पुद्गल है हर हाल॥३.३५.२१.६४४॥

 

जिसमें पूर्ण गलन की क्रिया होती है अर्थात जो टूटता जुड़ता रहता है वह पुद्गल है। स्कन्ध की भाँति परमाणु के भी स्पर्श, रस, गन्ध, वर्ण गुणों मे सदा पूर्णगलन क्रिया होता रहती है इसलिये परमाणु भी पुद्गल है।

 

The particles of matter unite and disunite like molecules of matter, the particles of matter have touch, taste, smell and colour. Hence are also matter.

(644)