निर्विचिकित्सा Free from Disgust

 

जो ण करेदि जुगुप्पं, चेदा सव्वेसि मेव धम्माणं।
सो खलु णिव्विगिच्छां, सम्मादिट्ठी मुणेदव्वो।।१८।।SSU

 

ग्लानि जो करता नहीं, वस्तु धर्म पहचान।
निर्वचिकित्सा गुण कहें सम्यक दृष्टि ज्ञान॥२.१८.१८.२३६॥

 

जो समस्त वस्तुओं के धर्मों को पहचान कर उनसे ग्लानि नही करता है वो निर्विचिकित्सा धारक सम्यग्दृष्टि है।

 

He who does not exhibit contempt or disgust towards any of the things, is said to be the right believer. (236)