सम्यग्चारित्र Right Conduct

 

भेद Types

व्रत Vows

– दान Charity

– साधु के २८ मूलगुण Basic virtues of saints

– श्रावक के ८ मूल गुण Basic virtues of householder

 

मोहतिमिरापहरणे, दर्शनलाभादवाप्तसंज्ञान:।
रागद्वेषनिवृत्त्यै, चरणं प्रतिपद्यते साधु:॥४७॥RKS

 

सम्यग्दर्शन लाभ मिला, हुआ मोह का नाश।
राग व द्वेष छूट गये, सम्यक्चारित्र प्रवास॥३.१.४७॥

 

मोहरूपी अंधकार के दूर होने से सम्यग्दर्शन का लाभ मिला और सम्यग्ज्ञान प्राप्त हुआ जिससे रागद्वेष को छोड़कर सम्यक्चारित्र की प्राप्ति करता हैं।

 

By destruction of darkness of faith obstructing attachment one attains right knowledge which leads to right conduct by getting rid of likes and dislikes.