स्थितिकरण Stabilisation

 

 

जत्थेव पासे कई दुप्पउत्त, काएण वाया अदु माणसेणं।
तत्थेव धीरो पडिसाहरेज्जा, आइन्न्ाओ खिप्पमिव क्खलीणं।।२२।।SSu

 

जब स्वयं में दोष दिखे, मन वचन और काय।
धीरज खींचे रास को, वापस रस्ते आय॥२.१८.२२.२४०॥

 

जब अपने मे दोष की प्रवृत्ति दिखायी दे, उसे तत्काल ही मन, वचन व काया से सम्यग्दृष्टि रखते हुए समेट ले जैसे बेक़ाबू घोड़ा रास के द्वारा सीधे रास्ते पर आ जाता है।

 

The wise man, whenever he comes across an occasion for some wrong doing on the part of body, speech or mind, should withdraw himself there from, just as a horse of good pedigree is brought to the right track by means of rein. (240)