सच्चे गुरु True Teacher

 

विषयाषावशातीतो, निराम्भोऽपरिग्रह:।
ज्ञानध्यानतपोरत्नस्तपस्वी स प्रशस्यते ॥१०॥ RKS

 

गुरु उत्तम जो विषय रहित, परिग्रह नहीं जान।
लीन रहे जो हर समय, तप ध्यान हो ज्ञान॥१०॥

 

प्रशंसनीय गुरु वह है जो विषयरहित, आरम्भरहित, परिग्रहरहित और ज्ञान, ध्यान और तप में लीन है।

 

True teacher is who is desireless, beginningless and possessionsless and who is always absorbed in study, meditation and austerities.

 

इदमेवेदृशमेव, तत्त्वं नान्यन्न चान्यथा ।
इत्यकम्पायसाम्भोवत् सन्मार्गेऽसंशया रुचि:॥११॥